Wednesday, April 8, 2015

पहिया.. ज़िन्दगी का



किसी ने ठीक ही कहा है “ज़िन्दगी का पहिया बदस्तूर सरकता रहता है जीवन में परिवर्तन का दौर चलता रहता है.” परिवर्तन जरुरी भी है तभी हम ज़िन्दगी के अलग अलग आयामों से खुद को परिचित करा पाएंगे. ज़िन्दगी का पहिया शुरू होता है हमारे जन्म से और हमारी मृत्यु पर जाकर रुकता है. इस पूरे सफ़र में हम ज़िन्दगी के कई दौर से गुजरते हैं. और हर दौर में ठीक पहिये जैसी छाप हमारी ज़िन्दगी में रह जाती है. जीवन के शुरूआती दौर में हमें सबसे प्यारी यादें मिलती हैं क्युकी वो हमारा बचपन होता है. हम दुनिया को देखते हैं सीखते हैं. उस समय हमारा विकास बहुत तेजी से होता है, अपने परिवार के साथ बिताया हुआ सबसे हसीं पल. फिर पहिया थोडा आगे बढ़ता है पीछे हमारी शैतानियों, बदमाशियों, लाड प्यार की छाप छोड़ते हुए. अब हम थोड़े बड़े होते हैं, स्कूल जाते हैं. वो दौर भी सबसे अच्छा होता है सुकून से भरा. स्कूल के दोस्त, टीचर, होमवर्क, क्लास टेस्ट, घर आके माँ का प्यार सब एक अलग ही अनुभव करा जाते हैं. इन् दरमियाँ हमारे भाई बहन का भी बहुत अच्छा रोल होता है. गर्मी की छुट्टियों में इन लोगों के साथ सारी शैतानियाँ करना, खेल कूद करना इत्यादि. फिर समय के साथ यह पहिया आगे बढ़ता है ज़िन्दगी का. और नए लोग जुड़ते हैं हमारे जीवन में. यह हमारी ज़िन्दगी का वह दौर होता है जब हम सिखने के साथ साथ समाज में अपना भी योगदान देते हैं. लोगों के पक्षों को सुनने के साथ साथ अपना भी मत देते हैं और तब हमारी सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ जाती है. हमारे कुछ लक्ष्य बनने लगते हैं जिन्हें हम पूरा करते हैं. कुछ लोग आसानी से सोशल हो जाते हैं तो कुछ अपने में ही सिमट के रह जाते हैं. पहिया और आगे बढ़ता है अब हमारे ऊपर हमारे परिवार की जिम्मेदारी आती है, शादी होती है एक नयी ज़िन्दगी शुरू होती है. सारी जिम्मेदारियां ऑफिस से लेकर घर तक पूरी करते हुए कुछ लोग उन्हें भूल जाते हैं जिनका ज़िन्दगी के पहिये को चलाने में सबसे बड़ा योगदान है, हमारे माँ बाप. वो भी हमारा ही परिवार हैं जिनकी हर मोड़ पर हमें जरुरत होती है. एक दिन हम भी इसी दौर से गुजरेंगे जिससे वो गुजर रहे. जो आज उनका है वो हमारा कल होगा शायद इसी को कहते हैं ज़िन्दगी का पहिया. जो चलता रहता है और कभी किसी के लिए रुकता नहीं. ज़िन्दगी के इन् सभी पड़ाव से गुजरते हुए हमें बहुत से लोग मिलते हैं कुछ हमेशा के लिए साथ रह जाते हैं तो कुछ की बस यादें रह जाती हैं. कुछ लोगों के मिलने से ज़िन्दगी एकदम बदल जाती है और एक नयी पहचान मिलती है लेकिन ज़िन्दगी कभी रूकती नहीं है. परिवर्तन होता रहता है ज़िन्दगी में. शायद इसी का नाम है ज़िन्दगी. जीवन का पहिया एक ही बार घूमता है और ये कभी बैक गियर नहीं लेता अतः ये हमारी जिम्मेदारी है की हम अपने इस जीवन को कितना सार्थक बनाये. ज़िन्दगी तो जानवरों की भी होती है लेकिन हमें ज़िन्दगी केवल जीना नहीं बल्कि कुछ ऐसा करना है की हमारा वजूद हमारी ज़िन्दगी का पहिया लोगों के जीवन में भी अपना छाप छोड़ जाये.
ज़िन्दगी का पहिया गोल है..
आज तू ऊपर कल मैं..
दूसरों को क्यों दुःख देता है...
नसीब बदलती है एक पल में...
अब बात आती है आखिरी दौर की  जैसे पहिया चलते चलते घिस जाता है वैसे ही हमारी ज़िन्दगी का पहिया भी चलते चलते एक दिन घिस जाता है वह होता है हमारे जीवन का अंत और इस पहिये को उसका ब्रेक मिल जाता है.

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