प्रिय किसान
बहुत दुःख हुआ यह जानकर की मेरी वजह से तुम्हारी पूरी मेहनत, तुम्हारी कमाई सब
कुछ बर्बाद हो गयी. मैं समझ सकती हूँ क्या बीत रही होगी तुम्हारे परिवार पर खासकर
तुम पर जब हर रोज मेरे बादल आते हैं और बारिश से तुम्हारी फसलों को नुकसान कर जाते
हैं. अभी तो फसल तैयार ही हुई थी तुम्हारी और तब तक मेरा कहर.. अब तक तो सत्तर फीसदी
फसल बर्बाद हो चुकी है. अलग अलग राज्यों में आंकड़े अलग अलग, सबसे ज्यादा तो उत्तर
भारत में मेरा कहर है. बाढ़ की वजह से तो लोग बेघर ही हो गये. तुम्हे लग रहा होगा
की मैं कितनी क्रूर हो गयीं हूँ तुम्हारे प्रति, तुम्हारे दुःख का सबसे बड़ा कारण
तुम मुझे ही समझ रहे होगे. तुम्हे याद है कैसे तुम हर साल सावन में मेरा बेसब्री
से इंतज़ार करते थे और मेरे आने का जश्न मनाते थे. मगर अब मेरा आना तुम्हे
बिलकुल भी रास न आता, तुम्हारा दिल थम जाता क्योंकि अब मेरा आना अनियमित हो गया है
कभी भी आ जाते हैं मेरे बादल. मैं जान बुझ कर ऐसा नहीं करती, क्योंकि अब भी मैं वही
तुम्हारी पुरानी दोस्त हूँ जो तुम्हे फसलों को लहलहाते हुए देखकर तुम्हारी ख़ुशी से
सुकून महसूस करती थी. और आज तुम्हारे दुःख से उतना ही दुःख भी हो रहा है.
तुम्हारे ही तरह मेरे और भी दोस्त हैं जैसे गौरैया, ये सारी प्रजातियाँ तो मानो विलुप्त ही हो गयी हैं . इन सबका कारण तो तुमसे भी छुपा नही होगा. इस पत्र के ज़रिये मैं बस यही
बताना चाहती हूँ की मैं तुम्हारी प्रकृति अभी भी वही हूँ बस तुम्हारे मानव भाइयों
द्वारा किये जा रहे प्रदूषण से मेरी भी दिनचर्या ख़राब हो गयी है. मैं समझ रही हूँ
की ये सारे प्रयास विकास की ओर ही हैं, ये सारी इन्टरनेट तरंगे जिसकी वजह से खासकर
पक्षियों पर प्रभाव पड़ा है, तुम्हे एक विकसित देश की ओर अग्रसर करेंगी. और बिलकुल
मुझे बहोत ख़ुशी होती है तुम लोगों की कामयाबी से. बस मैं इतना कहना चाहती हूँ की
सारे प्रयोग करो खूब आगे बढ़ो मगर प्रकृति को अनदेखा न करो. जितना हो सके वृक्ष
लगाओ, साफ़ सफाई पर ध्यान दो. पुनर्चक्रण विधि का जितना हो सके प्रयोग करो. अब तो मानव
और भी समझदार हो गया है तो अपनी सूझ बूझ विकास के साथ साथ वातावरण के योगदान में
भी लगाओ. क्योंकि जब तक तुम लोग सहयोग नहीं करोगे मैं भी कुछ नहीं कर सकती.
कितने सारे किसान हर रोज मर रहें हैं. यह आंकड़ा भी 50 से 60 हर रोज का है. रोज
मेरे दोस्तों को मरता देख कर मुझे भी अपार दुःख होता है. मेरे दोस्त मरना किसी
समस्या का हल नहीं. सोचो तुम्हारे पीछे तुम्हारे परिवार उनका क्या हाल होगा. यहाँ
तक की तुम लोगों की ज़मीन जायदाद तक छिनने की नौबत आ गयी, ऐसे में मैं बस यही
कहूँगी की हिम्मत मत हारो, मेरा सहयोग करो अपने दुसरे मित्रों को जागरूक करो की वह
भी प्रकृति के प्रति जिम्मेदार हों. फिर से कोशिश करो सब ठीक हो जायेगा. तुम्हारे
घर तुम्हारी फसलें तुम्हारा परिवार सब तरक्की करेंगें. याद रखना मैं और मेरी दुआएं
हमेशा तुम्हारे साथ है.
तुम्हारी प्यारी दोस्त
प्रकृति
No comments:
Post a Comment