यह शिकायत हर उस लड़की की है जो मेरी तरह एक छोटे से शहर से बिलोंग करती है। जिसे अपनी ज़िन्दगी उसके आस पास की बाकि लड़कियों की तरह नई बितानी जो केवल घर की चार दीवारो में सिमट के रह जाती है। मेरे माँ बाप के सहयोग से ही मैंने आत्मनिर्भर होने का फैसला किया और यहाँ तक आई। अब आप सोच रहे होंगे कि जब सब कुछ अच्छा है तो शिकायत क्यों ?? और माँ बाप से भी कभी किसी को शिकायत होती है क्या ?? लेकिन अगर मैं मेरे माँ पापा से प्यार करती हु तो शिकायत भी करुँगी।
मैं बहुत शुक्रगुज़ार हु कि मुझे मेरे माँ बाप मिले जो हमेशा मेरे लिए सबसे अच्छा चुनाव करते है व मेरी इच्छाओ और खुशियों का पूरा ध्यान रखते है। मुझे याद है बचपन में मैं बहुत ज़िद्दी थी और अगर कोई चीज पसंद आ गयी तो वह चाहिए ही उसी समय किसी भी कीमत पर। वो मेरे पापा थे जो किसी भी तरह वो चीज लेके देते और कभी जब मैं डरी सहमी सी होती तो वो मेरी माँ थी जो हमेशा मेरे साथ होती। अब जब मैं बड़ी हो गयी हु तो मुझे भी अपने दायित्व का एहसास होता जो मेरे माँ बाप के प्रति हैं। घर में सबसे बड़ी बेटी होने के नाते ये जिम्मेदारी थोड़ी और बढ़ गयी। अतः मम्मी पापा की उम्मीदें भी बढ़ गयी। चलो कोई बात नहीं मेरे माँ बाप मुझपे भरोसा करते हैं तभी तो ये अपेक्षाएं बढ़ी। इनकी अपेक्षाएं पूरी करते करते मैंने महसूस किया कि मेरी सोच व मेरे माँ बाप की सोच में एक डिफरेंस आने लगा और यह डिफरेंस समय के साथ बढ़ने लगा। मैं सब कुछ उनके अनुसार ही करती परन्तु न जाने क्यों कोई न कोई सवाल खड़े हो जाते। मैं यह नहीं कहती कि उन्हें मेरी खुशियों की परवाह नहीं लेकिन जो मैं उन्हें समझाना व बताना चाहती हूँ समझ नहीं पाते ।
मम्मी पापा ! मुझे आपसे सबसे बड़ी शिकायत है कि आप लोग मेरी शादी के लिए इतना क्यों परेशान हैं। जब होनी होगी तो हो ही जाएगी। मुझे याद है अभी मैंने 12th ही पूरा किया किया था और आप लोग specially मम्मी आप मेरे लिए लड़के ढूंढने लगी। और ये सिलसिला अब तक चल रहा है। मैंने कहा था न कि मुझे अपनी ज़िन्दगी में कुछ अच्छा करना है , कुछ बनना है। हाँ मुझे पता है कि आप इस बात के लिए मेरा पूरा सपोर्ट करते हैं लेकिन मैं कैसे समझाऊं कि शादी के बाद मेरी यह ज़िन्दगी नहीं रह जाएगी कि मैं खुद के फैसले ले सकूँ आखिर हूँ तो एक लड़की ही ना। मम्मी जो तर्क देती है इन सब का मैं समझ रही हूँ कि एक समय होता है जब शादी करवा देनी चाहिए। लेकिन अभी वो समय नहीं है, अभी तो मेरी ज़िन्दगी शुरू ही हुई है। इसके बाद भी मैं ज्यादा बहस नहीं करती हूँ और उन्हें लगता है कि सब ठीक है। .... पर सब ठीक नहीं है।
सब कुछ आपके अनुसार करती हूँ लेकिन जब बात आती है कि मुझे कहीं दूर घूमने जाना है तो तुरंत मना कर दिया जाता है आपका कहना है कि पहले पढाई कर लो फिर। लेकिन अभी तो आप शादी भी जल्दी करने को बोल रहे थे तो उसका क्या। यही तो अभी समय है जब मैं अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से एन्जॉय कर लू। रही बात पढाई की तो मुझे भी ये एहसास है अगर पढूंगी नहीं तो जो इतने सपने देख रखे हैं उन्हें पूरे कैसे करुँगी। और अब इतनी समझ तो आ ही गयी है कि क्या सही है क्या गलत है। मैं आपका दिल से शुक्रिया करती हुँ कि मुझे मेरी पसंदीदा पढाई व करियर चुनने में मेरा साथ दिया। जब इतना सपोर्ट कर दिया तो यह भी विश्वास रखिये कि कभी भी कोई गलत काम नहीं करुँगी ना ही आप लोगो को कोई दुःख होगा मेरी वजह से। एक सवाल मेरा - अगर मैं लड़का होती तो शायद ये सब बंदिशे ना होती और शायद मेरे कही आने जाने से आपको कोई दिक्कत नहीं होती और ज़िन्दगी कुछ और ही होती है ना।
मैं यह भी समझ रही हूँ आप लोगो की परेशानी की एक और वजह है रिश्तेदार। ये जो रिश्तेदार लोग होते हैं ना यही सबसे ज्यादा दिमाग लगाते हैं। मुझे याद है जब मेरे बोर्ड के परीक्षा परिणाम आने वाले थे सबसे ज्यादा रिश्तेदारों को चिंता थी। अरे भईया आप लोग रिश्तेदार हैं रिश्ते निभाइए क्यों हमारी निजी ज़िन्दगी में दखल दे रहे हैं। माँ बाप अगर इनकी बातो पे ध्यान देना बंद कर दे तो आधी टेंशन दूर हो जाये।
मुझे पता है मैं जहाँ से बिलोंग करती हूँ वहां ये सब आम बात है कि लड़कियों शादी समय से हो जाये , बहुत ध्यान दिया जाता है क्योंकि लड़की हैं। लेकिन अगर आप लोगों का जब इतना सहयोग मिल गया कि मैं यहाँ तक आई हूँ तो थोड़ा सा और सहयोग कर दीजिये की मैं अपने लक्ष्य को हासिल कर लूँ और विश्वास दिलाती हूँ आपको बिलकुल भी निराश नहीं करुँगी। आप लोगों ने जैसी परवरिश दी है मैं आप लोगों को दुखी करने के बारे में सोच भी नहीं सकती। मुझे और कोई शिकायत नहीं है आपसे , बस इतना कर दीजिये कि जो मेरा पॉइंट ऑफ़ व्यू है उसे समझिए। हमेशा मैं गलत ही नहीं होती।
बहरहाल चीजे अब काफी बदल रही हैं। मुझे लग रहा है थोड़ी और कोशिश अगर मैं कर लूँ तो ये जो डिफरेंसेस हैं न कम हो जायेंगे। मेरी तो यही शिकायत है मगर आप लोगों की भी कुछ अलग अलग शिकायतें होंगी अपने माँ बाप से। जैसे मुझे कहीं भी अकेले नहीं जाने दिया जाता है वैसे ही आप लोगों पर भी कोई न कोई पाबंदी तो होगी ही कि सब करो मगर ये न करना वो न करना।
अब समय आ गया है की ये पाबंदी हटे। इसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी है कि माँ बाप से बात की जाये , जितना हो सके सवाल किये जाये। सवाल करेंगे तो जवाब मिलेंगे और बदलाव आएगा, सोच में , नज़रिये में।
शिकायत आपकी लाज़मी है और आपका ये हौसला वाकई काबिलेतारीफ है कि पेरेंट्स को अब बच्चों से संवाद कर उनके मनोभाव को समझना चहिये और उन्हें पढ़ने और खुद को साबित करने का मौका देना चाहिए . . .
ReplyDeleteYes of-course u r right !!! But still few things are remaining there !
ReplyDeleteProbably we are not able to see at least few of those from our EYE...And i don't know the extent but I think kuch chheze ho sakta hai aur beetter ho jaye ...thoda better aur better :::))))
Its blog or your personal story???????
ReplyDeleteDon't write your own story here.