Monday, February 23, 2015

चिट्टियाँ कलाइयाँ वे ....




चिट्टियाँ कलाइयाँ वे ओ बेबी मेरी चिट्टियाँ कलाइयाँ वे .....बड़ा ही प्रचलित गाना है फिल्म रॉय का . एक और सोंग हो जाये ... गोरी हैं कलाइयाँ तू लादे मुझे हरी चूड़ियाँ... क्यों भईया केवल गोरी कलाइयाँ ही होती हैं क्या ??? काली भी तो हो सकती हैं ना ?? क्या हमारे यहाँ काली लड़कियां या सांवली लड़कियां नहीं होती हैं ?? फिर ऐसे रंगभेदी गाने क्यों ??
ये बातें कभी समझ में नहीं आई की ये जो श्वेत वर्ण पर इतना गौर किया जाता है तो आखिर क्यों ? हमारे भारत में तो हर तरह की लड़कियां हैं . कोई गोरी हैं तो कोई सांवली हैं तो कोई काली . लेकिन हर क्षेत्र में गोरी लड़कियों को महत्व दिया जाता है . चाहे वो शादी हो या नौकरी , फ़िल्में हो या सेमिनार और कांफ्रेंस, यहाँ उन्ही लड़कियों को आगे रखा जाता है जो दिखने में श्वेत होती हैं . काली या सांवली लड़कियों को हमेशा back stage ही रखा जाता है या लिया ही नहीं जाता . ऐसे में ये श्याम वर्ण लड़कियां कहाँ जाएँगी ?? 

शादी के लिए तो specially गोरी लड़कियों की मांग होती है . अगर लड़की सांवली हो या काली होती है तो दहेज़ की मांग विशेष रूप से बढ़ जाती है . एक वाकया मेरे जान पहचान में ही हुआ था उसका ज़िक्र करना चाहूंगी . एक लड़की रहती है जिसके नैन नक्श तो बहुत अच्छे थे प्रतिभावान भी बहुत थी . परन्तु काली थी उसके भाई बहन सब गोरे थे . उसकी दादी हमेशा उसे कोसती थी की ये कैसा श्राप परिवार में पैदा हो गयी अब इसके दहेज़ के लिए भी पूँजी एकत्रित करना होगा और भी न जाने क्या क्या ??? फिर उसकी शादी हुई तो उसके माँ बाप ने किसी तरह दहेज़ देकर उसे विदा किया सोचा बहुत खुश रहेगी . लेकिन उसके ससुराल में भी उसके पति और सास हमेशा ताने देते , कहते दिखने में तो सुन्दर नहीं कम से कम दहेज़ ही ले आती . इतने सारे ताने सुन सुन कर तंग आके उसने कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर लिए जिससे साइड इफ़ेक्ट हो गये और अब उसका इलाज़ कराना पड़ा.  न जाने ऐसी  कितनी घटनाएँ हमारे व आपके आस पास होती हैं .

बाज़ार में भी ये जो ब्यूटी प्रोडक्ट्स आ रहे हैं इनका भी मुख्य उद्देश्य इसी बात पर होता है की “ इनकी क्रीम लगायें और इतने दिनों में गोरे हो जायें “ गोरे ही होने पर फोकस क्यों ? गोरे होने की चाह में ही वो लड़की आज त्वचा सम्बन्धी रोग से पीड़ित है और उसका इलाज़ चल रहा . अगर इतने ताने न मिलते उसे तो शायद ऐसे न होता .

फिल्मों और मनोरंजन की दुनिया में भी श्वेत लड़कियों को ज्यादा तवज्जो दी जाती है . टी वी एंकर हो या रिपोर्टर , हेरोइनें हों या सेल्स गर्ल्स हर जगह गोरी लड़कियों की ही मांग हैं . ऐसे में सावली व काली लड़कियों का आत्मविश्वास ख़त्म हो जाता है . हुनर होने के बाद भी वो अपने में ही सिमट कर रह जाती हैं . जरुरत है इस भेदभाव की समाप्ति का . हमारे आस पास ऐसे बहुत से उदहारण हैं जहाँ काली लड़कियां भी आगे हैं देश का नाम रौशन कर रहीं . पी टी उषा के नाम से तो हम सब परिचित हैं . अगर आज उनके प्रतिभा को रंगभेद की वजह से दबा दिया गया होता तो वह आज इतनी बड़ी अथेलेट न होतीं . अतः ऐसी ही तमाम लड़कियां हैं जिनके अन्दर कुछ करने का, आत्म निर्भर होने का और  खुद को साबित करने का जज्बा होता है, हुनर होता है, उन्हें केवल वर्ण की वजह से रोक देना कहाँ का न्याय है ?? उनके सपनों को केवल इस वजह से चूर कर देना कि वो दिखने में सुन्दर नहीं और साँवली हैं, ये कैसी मानवता है ??

Wednesday, February 18, 2015

Women are not the opportunity they are responsibility……


औरतें अवसर नहीं जिम्मेदारी हैं .... 

 

जब लोग ये समझ जायेंगे तो शायद हमारे समाज से कुछ बुराइया ख़तम हो जायें.  इसके लिए सबसे पहले जरुरी है ये समझना कि वो हैं कौन ???

आइये ज़िन्दगी के कुछ पहलुओ से रूबरू होते हैं. जब एक छोटा सा बच्चा पैदा होता है तो सबसे पहले वो किससे जुड़ता है. अरे जुड़ना छोडिये वो आता ही कहा से है एक औरत के गर्भ से जहाँ वो 9 महीने तक अपना आकार लेता है . फिर जब वो बाहर आता है तो जो सबसे पहले उसे अपनाती है वो भी वही औरत होती है उसकी माँ . कितने ही प्यार से वह माँ अपने उस बच्चे का पालन करती है. अच्छी अच्छी बातें सिखाती है . जब वह बीमार होता है तो रात रात भर जगती है. अच्छे से अच्छी परवरिश देती है. अब जो दूसरी औरत उसके संपर्क में आती है वो है उसकी बहन. वो बहन भी बिना कुछ डिमांड किये केवल उस भाई की रक्षा करती है उसके साथ खेलती है शैतानी करती है और उसके हिस्से की डांट भी सुनती है . फिर वह और भी बड़ा होता है तो उसकी दोस्ती होती है किसी लड़की से . वह लड़की उसे क्लास के नोट्स देती है . प्रोजेक्ट्स पूरे करवाती है, एग्जाम में उसकी मदद करती है. फिर जब उसकी शादी होती है तो वो उसकी पत्नी होती है जो हर कदम पर उसका साथ देती है. लेकिन जब उसी के घर बात आती है कि लड़की का जन्म हो या लड़के का तो वो लड़के को चुनता है. क्या यहाँ वह भूल जाता है कि ज़िन्दगी की शुरुआत से लेकर हर उस महत्वपूर्ण पहलुओं पर सबसे पहले जिसने साथ दिया वो एक औरत ही थी . औरत न होती तो शायद उसका जन्म भी न हुआ होता . यही नहीं जब वह बाहर जाता है तो दूसरी औरतों से ऐसे व्यवहार करता है जैसे वो उनकी जागीर हों. क्या वो परवरिश, वो सीख, वह भूल जाता है . 

मैं केवल पुरुषों को ही दोषी नहीं मानती इसका . औरतें भी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं . अगर पुरुष उनके साथ कुछ गलत करते हैं जैसे घरेलु हिंसा या बलात्कार तो औरतें भी चुप रहकर उनका साथ देती हैं . या अगर कोई औरत इनके खिलाफ आवाज़ उठाती है तो दूसरी औरतें उसे दबाने की कोशिश करतीं हैं. हर दो घंटे में एक बलात्कार का मामला सामने आता है . ये वो केस है जो सामने आते हैं बहोत से केस तो ऐसे भी होते हैं जिन्हें दबा दिया जाता है वजह कोई भी हो पर या तो पुलिस वाले या उस लड़की के घर वाले पीछे हट जाते हैं.  

सबसे संगीन मामला है right to birth of a girl child. इसमें भी औरत और पुरुष मिलके जिम्मेदार हैं . सत्यमेव जयते का एक एपिसोड याद आता है जिसमे एक आई ए एस के घर लड़की पैदा होती है तो उस आई ए एस की माँ को इतनी दिक्कत होती है की उस लड़की को सीढियों से धक्का दे देती है . ऐसे तमाम वाकये हमारे और आपके आस पास भी देखने को मिलते ही होंगे . यही वजह है की आज भारत में लड़के व लड़कियों के अनुपात में इतनी कमी आई है. मैं कहीं और की बात क्या कहूँ जब हमारे देश की राजधानी में ही यह आंकड़ा 868 females per 1000 males है . बाकी के शहरों में भी यह आंकड़े कुछ इसी प्रकार ही हैं. 

अब बात आती है शिक्षा की तो सबको बराबर की शिक्षा देने के साथ साथ सोच को भी बदलने की सीख देनी चाहिए क्योंकि ये जो समस्याएं हैं न वास्तव में यह समस्याएं नहीं हमारे व आपके द्वारा उत्पन्न की गयी सोच है जिसे हम व आप मिलकर ही बदल सकते हैं. जैसे अगर कोई लड़की बाहर जाती है या कुछ भी करती है तो घर वाले पूरी निगरानी रखते हैं ऐसे ही लड़कों की भी सारी हरकतों पर पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए. यहीं बात आती है right to equality. अगर हम इन जिम्मेदारियों को समझ लें और एक दूसरे के प्रति जिम्मेदार हो जायें तो शायद समाज को एक नयी दिशा, एक नया मोड़ मिल जाये.
 

Saturday, February 14, 2015

मेरी शिकायत मेरे माँ बाप से। .......

 

यह शिकायत हर उस लड़की की है जो मेरी तरह एक छोटे से शहर से बिलोंग करती है।  जिसे अपनी ज़िन्दगी   उसके आस पास की बाकि लड़कियों की तरह नई बितानी जो केवल घर की चार दीवारो में सिमट के रह जाती है।  मेरे माँ बाप के सहयोग से ही मैंने आत्मनिर्भर होने का फैसला किया और यहाँ तक आई।  अब आप सोच रहे होंगे कि जब सब कुछ अच्छा है तो शिकायत क्यों ?? और माँ बाप से भी कभी किसी को शिकायत होती है क्या ?? लेकिन अगर मैं मेरे माँ पापा से प्यार करती हु तो शिकायत भी करुँगी।  

मैं बहुत शुक्रगुज़ार हु कि मुझे मेरे माँ बाप मिले जो हमेशा मेरे लिए सबसे अच्छा चुनाव करते है व मेरी इच्छाओ और खुशियों का पूरा ध्यान रखते है।  मुझे याद है बचपन में मैं बहुत ज़िद्दी थी और अगर कोई चीज पसंद आ गयी तो वह चाहिए ही उसी समय किसी भी कीमत पर।  वो मेरे पापा थे जो किसी भी तरह वो चीज लेके देते और कभी जब मैं डरी सहमी सी होती तो वो मेरी माँ थी जो हमेशा मेरे साथ होती। अब जब मैं बड़ी हो गयी हु तो मुझे भी अपने दायित्व का एहसास होता जो मेरे माँ बाप के प्रति हैं।  घर में सबसे बड़ी बेटी होने के नाते ये जिम्मेदारी थोड़ी और बढ़ गयी।  अतः मम्मी पापा की उम्मीदें भी बढ़ गयी। चलो कोई बात नहीं मेरे माँ बाप मुझपे भरोसा करते हैं तभी तो ये अपेक्षाएं बढ़ी।  इनकी अपेक्षाएं पूरी करते करते मैंने महसूस किया कि मेरी सोच व मेरे  माँ बाप की सोच में एक डिफरेंस आने लगा और यह डिफरेंस समय के साथ बढ़ने लगा। मैं सब कुछ उनके अनुसार ही करती परन्तु न जाने क्यों कोई न कोई सवाल खड़े हो जाते। मैं यह नहीं कहती कि उन्हें मेरी खुशियों की परवाह नहीं लेकिन जो मैं उन्हें समझाना व बताना चाहती हूँ  समझ नहीं पाते ।  

मम्मी पापा ! मुझे आपसे सबसे बड़ी शिकायत है कि आप लोग मेरी शादी के लिए  इतना क्यों परेशान हैं।   जब होनी होगी  तो हो ही जाएगी।  मुझे याद है अभी मैंने 12th  ही पूरा किया किया था और आप लोग specially मम्मी आप मेरे लिए लड़के ढूंढने लगी।  और ये सिलसिला अब तक चल रहा है।  मैंने कहा था न कि मुझे अपनी ज़िन्दगी में कुछ अच्छा करना है , कुछ बनना है।  हाँ मुझे पता है कि आप इस बात के लिए मेरा पूरा सपोर्ट करते हैं लेकिन मैं कैसे समझाऊं कि शादी के बाद मेरी यह ज़िन्दगी नहीं रह जाएगी कि मैं खुद के फैसले ले सकूँ  आखिर हूँ तो एक लड़की ही ना।  मम्मी जो तर्क देती है इन सब का मैं समझ रही हूँ कि एक समय होता है जब शादी करवा देनी चाहिए।  लेकिन अभी वो समय नहीं है, अभी तो मेरी ज़िन्दगी शुरू ही हुई है।   इसके बाद भी मैं ज्यादा बहस नहीं करती हूँ  और उन्हें लगता है कि सब ठीक है। .... पर सब ठीक नहीं है।  
सब कुछ आपके अनुसार करती हूँ लेकिन जब बात आती है कि मुझे कहीं दूर घूमने जाना है तो तुरंत मना कर दिया जाता है आपका कहना है कि पहले पढाई कर लो फिर।  लेकिन अभी तो आप शादी भी जल्दी करने को बोल रहे थे तो  उसका क्या।  यही तो अभी समय है जब मैं अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से एन्जॉय कर लू। रही बात पढाई की तो मुझे भी ये एहसास है अगर पढूंगी नहीं तो जो इतने सपने देख रखे हैं उन्हें पूरे कैसे   करुँगी।  और अब इतनी समझ तो आ ही गयी है कि क्या सही है क्या गलत है।  मैं आपका दिल से शुक्रिया करती हुँ कि मुझे मेरी पसंदीदा  पढाई व करियर चुनने में मेरा साथ दिया। जब इतना सपोर्ट कर दिया तो यह भी विश्वास रखिये कि कभी भी कोई गलत काम नहीं करुँगी ना ही आप लोगो को कोई दुःख होगा मेरी वजह से।  एक सवाल मेरा - अगर मैं लड़का होती तो शायद ये सब बंदिशे ना होती और शायद मेरे कही आने जाने से आपको कोई दिक्कत नहीं होती और ज़िन्दगी कुछ और ही होती है ना।  

मैं यह भी समझ रही हूँ आप लोगो की परेशानी की एक और वजह  है रिश्तेदार।  ये जो रिश्तेदार लोग होते हैं ना यही सबसे ज्यादा दिमाग लगाते हैं।  मुझे याद है जब मेरे बोर्ड के परीक्षा परिणाम आने वाले थे  सबसे ज्यादा  रिश्तेदारों को चिंता थी।  अरे भईया आप लोग रिश्तेदार हैं रिश्ते निभाइए क्यों हमारी निजी ज़िन्दगी में दखल दे रहे हैं।  माँ बाप अगर इनकी बातो पे ध्यान देना बंद कर दे तो आधी टेंशन दूर हो जाये।  
मुझे पता है मैं जहाँ से बिलोंग करती हूँ वहां ये सब आम बात है कि लड़कियों  शादी समय से हो जाये , बहुत ध्यान दिया जाता है क्योंकि लड़की हैं।  लेकिन अगर आप  लोगों का जब इतना सहयोग मिल गया कि मैं यहाँ तक आई हूँ तो  थोड़ा सा और सहयोग कर दीजिये की मैं अपने लक्ष्य को हासिल कर लूँ और विश्वास दिलाती हूँ आपको बिलकुल भी निराश नहीं करुँगी।  आप लोगों ने जैसी  परवरिश दी है मैं आप लोगों को  दुखी करने के बारे में सोच भी नहीं सकती। मुझे और कोई शिकायत नहीं है आपसे , बस इतना कर दीजिये कि जो मेरा पॉइंट ऑफ़ व्यू है उसे समझिए।  हमेशा मैं गलत ही नहीं होती।  
बहरहाल चीजे अब काफी बदल रही हैं।  मुझे लग रहा  है थोड़ी  और कोशिश अगर मैं कर लूँ तो ये जो डिफरेंसेस हैं न कम हो जायेंगे।  मेरी तो यही शिकायत है मगर आप लोगों की भी कुछ अलग अलग शिकायतें होंगी  अपने माँ बाप से।  जैसे मुझे कहीं भी अकेले नहीं जाने दिया जाता है वैसे ही आप लोगों पर भी कोई न कोई पाबंदी तो होगी ही कि सब करो मगर ये न करना वो न करना।

अब समय आ गया है की ये पाबंदी हटे।  इसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी है कि माँ बाप से बात की जाये , जितना हो सके सवाल किये जाये।  सवाल करेंगे तो जवाब मिलेंगे और बदलाव आएगा,  सोच में , नज़रिये में।  

Thursday, February 12, 2015

My first experience.....

  Hello everyone..... now i am going to start my journey from here. First of all i want to thank my teacher MUKUL SIR for motivating us to express our views. I also want to thank MY FAMILY, MY FRIENDS, everyone who came in my life, some of them has gone n some of them are with me. I have learned many things and now i really want to share my experience.. Every person has many stories but only some of them make the world to be part of their stories. and i am going to start it with this ABSOLUTE ANJALI...