“जो होता है अच्छे के लिए होता है. अगर ज़िन्दगी आसान करनी है तो हमें समय के
साथ बढ़ जाना चाहिए.“ यह सोचना है आशुतोष जयसवाल जी का.
आशुतोष जयसवाल मेरे क्लासमेट हैं .. और एक बहोत ही अच्छे इंसान हैं. आज इनके
ज़िन्दगी के कुछ पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए मुझे बहुत ख़ुशी महसूस हो रही है . जैसा
आप सभी जानते हैं कि हर व्यक्ति में कोई न कोई खासियत होती है जिससे वह दूसरों से
अलग होता है. और यह बहोत जरुरी है की उनकी वो खासियत लोगों को पता हो. मेरी यह एक
छोटी सी कोशिश है आशुतोष जी की व्यक्तिगन ज़िन्दगी से आपको रूबरू करने की. आइये
इनके बारे में कुछ बाते जानते हैं इनसे ...
- सबसे पहले, आपका नाम है
आशुतोष. आप हमें बताइए इस नाम का मतलब क्या होता है ?
जी बिलकुल. मेरा नाम ‘ आशुतोष ‘ मेरी मम्मी ने रखा है. क्योकि ये भगवान शिव का
नाम है. आशुतोष बना है दो शब्दों से मिलकर- “आशु” व “तोश” जिसका मतलब है जल्दी
प्रसन्न होना. और हाँ मेरे नाम का असर भी है मुझपर. मेरा जन्म होली के दिन हुआ था
तो होली के आस पास ही मेरा जन्मदिन भी पड़ता है.
- बहोत ही प्यारा नाम है. अपने परिवार के बारे में कुछ प्रकाश
डालिए. कौन कौन हैं आपके घर में?
मेरे परिवार में.. मेरे माँ पापा भैया भाभी और दो छोटे भतीजे हैं. बहोत बड़ा
परिवार नहीं लेकिन सब एक दूसरे का सहयोग करते है. मेरे पूर्वज पहले महादेव(
बाराबंकी ) में रहते थे वहां उन्होंने मंदिर वगैरह बनवाए. फिर सभी लोग यहाँ शिफ्ट
हो गये तो मेरा जन्म भी यहीं हुआ.
- घर में सबसे ज्यादा किसके करीब हैं ?
वैसे तो सभी लोग मुझे प्यार करते हैं मगर मैं मेरी मम्मी के ज्यादा करीब हूँ .
बचपन से ही बहोत लाड़ प्यार मिला है. और छोटे होने का फायदा भी. खैर अब तो सबके ही
करीब होता हूँ कभी मम्मी तो कभी पापा तो कभी भैया.
- इतने प्यार के साथ साथ कभी कोई रोक टोक होती है आपके घर में
? और घर में होने वाले रेस्ट्रिक्ट रूल्स पर आपके क्या विचार हैं ?
नहीं कुछ खास रोक टोक तो नहीं लेकिन हाँ जो चीजों को सच में रोकना चाहिए और जो
चीजें संभव नहीं हैं उनपर रोक लगायी जाती है. और वो चीजे भी ऐसी ही होती हैं की एक
बार माँ पापा ने मना कर दिया तो खुद ही करने का मन नही करता है. और रही बात मेरे
विचार की तो हाँ सबका तो नहीं मगर कोई एक ऐसा होना चाहिए जिसकी बात सभी मानें, मगर
मेरे घर में दो लोग हैं पापा और भैया. हम सब उनकी बात मानतें हैं और वह भी हमारे
निर्णय में पूरा सहयोग देते हैं.
- क्या आप खुश हैं अपने परिवार से ? और क्या सोचते हैं अपने
परिवार के बारे में ?
हाँ मैं बहोत खुश हूँ की मुझे ऐसी फैमिली मिली. घर में खुद को बहोत रिलैक्स
फील करता हूँ. अब जब बड़ा हो रहा हूँ तो मुझे भी अपनी जिम्मेदारियां अपने परिवार के
प्रति जो हैं वो महसूस हो रहीं हैं. और यह हमेशा मुझे प्रेरित करती हैं.
- जैसा कि मैंने पाया आपकी 12th तक की पढाई C M S में हुई है. तो वहां आपकी
परफॉरमेंस कैसी रही ? कैसे स्टूडेंट थे आप ?
हाँ मेरी शुरू से ही पढाई C M S में हुई. मेरी परफॉरमेंस बहोत अच्छी थी वहां. सारे टीचर्स मेरे से खुश रहते थे. मेरा उदहारण दिया जाता था लोगों को. ओवरआल मैं एक
अच्छा बच्चा था. अभी भी अच्छा बच्चा हूँ लेकिन समय के साथ थोड़ा बदलाव और समझदारी आ
गयी है.
- स्कूल का पहला दिन कैसा रहा ?
स्कूल का पहला दिन तो मैं कभी नहीं भूल सकता. मुझे पहले तो पता ही नहीं था की
स्कूल क्या होता है. जब एडमिशन के लिए गए हम लोग तो लगा घुमने जा रहे लेकिन फिर
पापा मुझे वहीँ छोड़ कर चले आये. बहोत दुःख हुआ सबने धोखा देके स्कूल भेज दिया और
मैं पूरा दिन रोता रहा.
- अरे ये तो धोखा हो गया था. खैर फिर तो आपका मन लग गया होगा. दोस्त भी बने होंगे. तो दोस्ती कैसे हुई आपकी वहां ?
हाँ फिर धीरे धीरे मैं भी स्कूल के रूटीन में ढल गया. और दोस्त भी बने. दोस्ती
मेरी ऐसे ही सबसे क्लास में बातचीत से हो गयी. कुछ लोग बहोत अच्छे भी दोस्त बनें.
फिर स्कूल के बाद सब अलग हो गये, सब बाहर चले गए. सब लोग संपर्क में तो हैं मगर अब
वो बात नहीं रही.
- आपने आगे की पढाई के लिए फिर लखनऊ यूनिवर्सिटी ज्वाइन किया.
कैसा रहा आपका पहला दिन यहाँ? कॉलेज के नाम पे कोई क्रेज था ?
जी मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी ज्वाइन किया. शुरुआत में तो सब कुछ बहोत अच्छा लगा
लेकिन धीरे धीरे महसूस होने लगा की अब स्कूल नहीं रहा जहाँ आपको नोट्स मिलेंगे पढाई के
लिए प्रेशर मिलेगा. खुद ही नोट्स बनाने होंगे और खुद ही पढना होगा तभी पास हो सकते
हैं. कॉलेज के नाम पर क्रेज तो नहीं कहेंगे लेकिन नयी जगह जाने की नए लोगों से
मिलने की ख़ुशी थी. कुछ नए दोस्त बने तो कुछ पुराने जिनसे केवल जान पहचान थी उनसे
अच्छी दोस्ती हुई. सबसे अच्छा दोस्त बना पवन. हमने साथ में बहोत मस्ती की. कॉलेज
लाइफ पूरी तरह एन्जॉय किया.
- फिर आप आते हैं MJMC . आपने ये फील्ड क्यों चुना ?
पहला अनुभव कैसा रहा आपका यहाँ ?
मुझे MBA करना था लेकिन कम्पटीशन इतना ज्यादा हो गया था और एडमिशन भी मुश्किल
तो मैंने जर्नलिज्म चुना. शुरुआत से ही मुझे न्यूज़ में बहोत रूचि रही है. और
फाइनेंसियल रिपोर्टिंग में स्कोप ज्यादा दिखा और मुझे लगा की मैं इस फील्ड में
कुछ अच्छा और कुछ अलग कर सकता हूँ. मेरा पहला अनुभव.. मैं अपने आप को बहोत लो फील
करता था लगता था की मैं यहाँ के लिए क्वालिफाइड नहीं हूँ लेकिन धीरे धीरे पढ़ते पढ़ते
और टीचर्स के सहयोग से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा. यहाँ यूनिवर्सिटी लेवल पे बहोत अच्छी
पढाई होती है. मुझे एक अच्छा प्लेटफार्म मिला और अच्छे अच्छे अवसर भी प्राप्त हुए
यहाँ.
- आप अपने व्यक्तित्व के बारे में बताइए कैसे हैं आप? और कैसे
लोग आपको पसंद हैं?
मैं एक बहोत ही साधारण और नेचुरल इंसान हूँ मुझे फेक होना नहीं पसंद है किसी
के भी साथ. मैं जैसा हूँ वैसे ही लोगों से पेश आता हूँ. और मुझे मेरी ही तरह सिंपल,
खुले विचारों वाले, अच्छे नेचर वाले लोग पसंद है. जो लोग dominate करते हैं वो लोग
नहीं पसंद. मेरा मानना है की सबको बराबर समझना चाहिए. मेरे साथ मेरे दोस्त बिलकुल
सहज महसूस करते हैं.
- जैसा की सभी लडको को होता है. आपकी भी खेल के प्रति रूचि
होगी. तो कौन सा खेल पसंद है आपको ?
हाँ बिलकुल मुझे खेल बहोत पसंद है. क्रिकेट फूटबाल आदि ये सब पसंद है. और
भारतीय होने के नाते क्रिकेट का मैं बहोत बड़ा फैन हूँ. बचपन में खेलता भी था. मगर
अब खेलते तो नहीं लेकिन अभी भी पसंद है.
- राजनीती के बारे में आपकी क्या राय है? आपको रूचि है इनमे?
पहले तो ज्यादा रूचि नहीं थी लेकिन इस फील्ड में आने के बाद राजनीती के बारे
में जानने की इच्छा बढ़ने लगी. मुझे इकॉनोमी में ज्यादा रूचि है तो दोनों को कनेक्ट
कर लेता हूँ.
- जैसा कि आप जानते हैं अभी हाल ही में बजट आया है. आपके क्या
विचार हैं इस बार के बजट को लेकर ?
मेरे अनुसार तो यह अच्छा बजट आया है. इकनोमिक ग्रोथ होगी. कॉर्पोरेट को बढ़ावा
मिलेगा. प्रधानमंत्री के जन धन योजना का भी लाभ मिलेगा कॉर्पोरेट को.
एक चीज गलत हो गयी वो यह की मिडिल क्लास के लिए कुछ खास फायदा नहीं. जैसे कि
हेल्थ इन्सुरेंश के एक्सेम्प्शन लिमिट बढ़ा कर केवल उच्च श्रेणी को ही फायदा हुआ.
कोई ग्रोथ नार्मल नहीं बस मेथड बदला गया तो फिगर्स बढ़ गये हैं.
- आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है तो वीमेन एम्पावरमेंट के
बारे में अपने शब्द बताइए. महिलाओं को शशक्त करने के लिए सबसे जरुरी क्या है ?
बिलकुल यह बहोत जरुरी है की महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान मिले. इसके लिए
सबसे ज्यादा जरुरी है शिक्षा. एक दूसरे के बारे में बराबर की अवधारणा लाने की
जरुरत है. लोगों की स्टीरियो टाइपिंग को बदलना होगा. सुरक्षित माहौल तो दे पर रोक
टोक अच्छा नहीं. सबको बराबर की शिक्षा देने से लोगों में जागरूकता आएगी फिर वो एक
दुसरे के प्रति जिम्मेदार होंगे.
- भारत के शिक्षा प्रणाली के बारे में आप क्या सोचते हैं ?
हमारे देश में शिक्षा में काफी बदलाव आया है. पिछड़े वर्ग के लोगों को बढ़ावा मिला
है. लेकिन प्राइवेटाइजेशन ज्यादा होने से और फीस बढ़ने से थोड़ी दिक्कतें भी आई हैं
. स्टेट और सेट्रल यूनिवर्सिटीज को बढ़ाना चाहिए.
- बहोत ही अच्छे विचार रखते है आप. अच्छा अब ये बताइए कि
प्यार और शादी के बारे में आपका क्या सोचना है ?
मेरे अनुसार प्यार एक टौर्चेर है. मुझे सिंगल ही रहना पसंद है. और शादी के लिए
अभी टाइम है. कुछ लड़कों का मानना है की गर्लफ्रेंड होना स्टेटस को दर्शाता है मगर
मुझे ऐसा नहीं लगता. हाँ लड़कियों से दोस्ती करना पसंद है और करना भी चाहिए. तभी हम
लड़कों की रियल पर्सनालिटी बाहर आती है. एक्सपोज़र होना चाहिए लेकिन committment नहीं.
यह था मेरे और आशुतोष के बातचीत का
छोटा सा अंश. बहोत अच्छा लगा इनके बारे में जानकर. क्लास के दौरान तो मुझे इन्हें
जानने का ज्यादा मौका नही मिला लेकिन आज के इस साक्षात्कार में मैंने काफी कुछ
जाना इनके बारे में. आशुतोष जी महिलाओं की बहोत रेस्पेक्ट करते हैं. अपने दोस्तों
के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं. दोस्तों के साथ अपने परिवार को भी पूरा महत्व देते
हैं. एक पारदर्शी व्यव्हार के साथ एक जिम्मेदार इन्सान भी हैं. लोगों का भरोसा
नहीं टूटने देते हैं.
अंजली सिंह